
नई दिल्ली। पेरिस ओलंपिक में 9 अगस्त को भारत के लिए रेसलिंग में पहला पदक आ गया। 21 वर्षीय अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किलोग्राम वर्ग के ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में प्यूर्टो रिको के डरियन टोई क्रूज को 13-5 के अंतर से हराकर कांस्य पदक जीता। हालांकि, इस मुकाबले से पहले अमन के सामने भी विनेश फोगाट जैसी चुनौती आ गई थी। सेमीफाइनल के बाद उनका वजन 61 किलो से ज्यादा हो गया था, जो तय सीमा से काफी अधिक था। लेकिन कोच की कड़ी मेहनत और 10 घंटे की मेहनत के बाद, अमन ने अपना वजन 61.5 किलो से घटाकर 57 किलो से कम किया और ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबले में उतरने के लिए खुद को तैयार किया।
कड़ी मेहनत के बाद मिली सफलता
भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को सिर्फ 100 ग्राम वजन अधिक होने की वजह से स्वर्ण पदक मुकाबले से बाहर कर दिया गया था, जिससे पूरे देश में निराशा फैल गई थी। इसी तरह, अमन सहरावत के वजन बढ़ जाने से कोच के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। लेकिन सीनियर भारतीय कोच जगमंदर सिंह और वीरेंद्र दहिया ने अमन का वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने अमन को डेढ़ घंटे का मैट सेशन कराया और एक घंटे तक गर्म पानी से नहलाया। इसके अलावा, अमन ने एक घंटे तक ट्रेडमिल पर दौड़ लगाई और पांच सत्र सौना बाथ भी लिए। सुबह 4:30 बजे, जब अमन का वजन 56.9 किलोग्राम आया, तो सभी ने राहत की सांस ली।
रेसलिंग में भारत का लगातार 5वां पदक
पेरिस ओलंपिक में रेसलिंग में पदक के साथ ही भारत ने 2008 से इस इवेंट में लगातार मेडल जीतने की परंपरा को कायम रखा है। 2008 में सुशील कुमार ने भारत के लिए कुश्ती में ब्रॉन्ज मेडल जीता था, और अब तक यह भारत का रेसलिंग में 8वां ओलंपिक मेडल है। पेरिस ओलंपिक में रेसलिंग में अभी एक और पदक की उम्मीद है, और सभी की नजरें रितिका हुड्डा पर टिकी हैं।
यह भी पढ़ें: