
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बड़ा झटका दिया। आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा निचली अदालत के समक्ष पेश की गई सामग्री पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया।
ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जमानत पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की यह टिप्पणी कि भारी भरकम सामग्री पर विचार नहीं किया जा सकता, पूरी तरह से अनुचित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने ईडी को जमानत याचिका पर उचित बहस का मौका नहीं दिया और पीएमएलए (PMLA) की अनिवार्य शर्तों पर पूरी तरह से जिरह नहीं की गई।
ईडी का निचली अदालत के निर्णय पर सवाल
प्रवर्तन निदेशालय ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि अदालत ने उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों पर सही तरीके से विचार नहीं किया। ईडी ने तर्क दिया कि अदालत ने एजेंसी को उचित जिरह करने का अवसर नहीं दिया। इसके अलावा, ईडी ने यह भी कहा कि 14 जून को मामला जिस अवकाश न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध था, उनका कार्यदिवस एक दिन का था। इसलिए, मामले को 19 जून को बैठने वाली अवकाश न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किया गया, जिनका कार्यदिवस दो दिन का था।
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जमानत पर पांच घंटे 30 मिनट की जिरह
नोट में इस बात का जिक्र किया गया है कि 19 जून को केजरीवाल की तरफ से एक घंटे और ईडी की तरफ से दो घंटे बहस की गई। इसके बाद 20 जून को हुई सुनवाई में ईडी ने एक घंटे 15 मिनट तक अपनी जिरह पेश की। कुल मिलाकर, पांच घंटे 30 मिनट की जिरह के बाद, अदालत ने सभी सामग्री पर गौर करने के बाद नियमित जमानत देने का निर्णय सुनाया। अदालत ने पाया कि केजरीवाल का विजय नायर और विनोद चौहान से कोई सीधा संपर्क नहीं था और गोवा चुनाव में रुपये खर्च करने का ईडी के पास कोई सबूत नहीं है।
केजरीवाल को जेल में ही रहना होगा
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अभी जेल में ही रहना होगा। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन फिलहाल, केजरीवाल के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ है।
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