
नई दिल्ली। कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के विरोध में शहरभर में आक्रोश है। इस घटना के खिलाफ आवाज उठाते हुए, कोलकाता की गणेश पूजा समितियों ने इस वर्ष गणेश उत्सव को बिना लाइट और सजावट के सादगी से मनाने का निर्णय लिया है। यह कदम घटनास्थल पर शोक और नाराजगी व्यक्त करने के लिए उठाया गया है।
‘दुष्कर्म के खिलाफ संघर्ष’ होगी पूजा की थीम
साल्ट लेक के बी ब्लॉक में 15 वर्षों से आयोजित हो रही गणेश पूजा इस बार विशेष होगी, क्योंकि आयोजकों ने अपने पंडाल की थीम ‘दुष्कर्म के खिलाफ संघर्ष’ पर केंद्रित करने का फैसला किया है। चंदरनगर से खरीदी गईं मशहूर लाइटों को इस बार इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जो इस उत्सव की खासियत रही हैं। पूजा समिति के अध्यक्ष अनिंद्य चटर्जी ने बताया कि पंडाल के रास्ते में न्यूनतम रोशनी होगी, जबकि पंडाल के अंदर केवल लाल रंग की रोशनी रहेगी, जो इस दुखद घटना के प्रति उनके विरोध को दर्शाएगी।
पूजा स्थल पर होगा विरोध का संदेश
पीएनबी द्वीप के पास स्थित पंडाल को ‘दर्शन रुखे दिन’ (दुष्कर्म के खिलाफ) के संदेश के कटआउट से ढक दिया जाएगा, जिसमें लिखा होगा, “अगर हम अभी इस खतरे को नहीं रोकेंगे, तो हमारा कोई प्रियजन अगला शिकार हो सकता है।” पंडाल के अंदर और बाहर की दीवारों पर दुष्कर्म के खिलाफ बड़े-बड़े अक्षरों में संदेश लिखे जाएंगे। पूजा समिति इस तरह से आरजी कर मेडिकल कॉलेज की पीड़िता के परिवार के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन प्रकट कर रही है।
दूसरी समितियों ने भी रद्द की सजावट
बाग बाजार सर्बोजनिन गणेश पूजा समिति ने भी अपने पंडाल के लिए ऑर्डर की गईं लाइटों को रद्द कर दिया है। समिति के प्रवक्ता ने कहा कि वे पिछले 12 साल से इस पूजा का आयोजन कर रहे हैं और स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए पूजा रद्द नहीं कर सकते, लेकिन इसे बेहद सादगी से मनाने का निर्णय लिया गया है। समिति का ध्यान अब इस बात पर है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए किस प्रकार से जागरूकता फैलाई जा सके।
मूर्तिकारों पर भी पड़ा असर
उत्तर कोलकाता के कुमर्तुली में गणेश मूर्तियों के स्टूडियो में इस घटना का असर भी देखा गया। मूर्तिकार मिंटू पाल ने कहा कि उनके स्टूडियो में बन रही 10-12 गणेश मूर्तियों की बुकिंग अब तक रद्द नहीं हुई है, लेकिन पूजा समितियों के इस फैसले के कारण उनका कारोबार भी प्रभावित हो सकता है।
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