
नई दिल्ली, 10 जून 2024: लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रमुख चिराग पासवान ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली। इस मौके पर चिराग ने प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे वे पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ निभाएंगे। चिराग ने हाजीपुर लोकसभा सीट से 1.70 लाख वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद चिराग पासवान ने कहा, “यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और मैं इसे पूरी ईमानदारी और कड़ी मेहनत के साथ निभाऊंगा। इसका श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है जिन्होंने एक छोटे दल पर विश्वास जताया और हमें सरकार में प्रतिनिधित्व दिया।”
प्रधानमंत्री मोदी की नई कैबिनेट में बिहार को महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। बिहार से कुल आठ मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिनमें से चार कैबिनेट मंत्री हैं। यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत समीकरणों को संतुलित करने की भाजपा की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
चिराग पासवान की राजनीतिक यात्रा में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत को संभालते हुए, चिराग ने बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उनकी केंद्रीय मंत्री के रूप में नियुक्ति से लोजपा के कार्यकर्ताओं में भी उत्साह है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में चिराग पासवान की नियुक्ति से यह साफ संकेत मिलता है कि भाजपा ने बिहार में अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल को और मजबूत किया है। चिराग पासवान की यह नई भूमिका उन्हें न केवल राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी, बल्कि बिहार की राजनीति में भी उनकी स्थिति को और सशक्त बनाएगी।
चिराग पासवान का राजनीतिक सफर की शुरुआत
मैं, चिराग पासवान ईश्वर की शपथ लेता हूं कि… pic.twitter.com/bECTYiTN33
— युवा बिहारी चिराग पासवान (@iChiragPaswan) June 9, 2024
चिराग पासवान का राजनीतिक सफर उनके पिता और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के मार्गदर्शन में शुरू हुआ। 2020 में रामविलास पासवान के निधन के बाद, चिराग ने पार्टी की कमान संभाली और बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को नेतृत्व दिया। हालांकि, इस चुनाव में पार्टी को सिर्फ एक सीट ही मिल सकी, लेकिन चिराग ने अपने राजनीतिक कौशल का परिचय दिया और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कड़ी टक्कर दी।
एनडीए से बाहर और पार्टी में फूट
चुनाव के नतीजों के बाद, लोजपा में फूट पड़ गई और चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस ने छह में से चार सांसदों को अपने गुट में शामिल कर लिया। चिराग राजनीतिक गुमनामी में चले गए और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी पारस गुट के पास चला गया। इस समय, चिराग ने नीतीश कुमार और जेडीयू को पार्टी विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया।
नरेंद्र मोदी के प्रति वफादारी
चिराग ने अपने तमाम असफलताओं के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी। उन्होंने खुद को नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ घोषित कर दिया, जिससे भाजपा ने उनके लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए। चिराग ने बिहार में अपनी आशीर्वाद यात्रा के साथ अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया और दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी।
केंद्रीय मंत्री के रूप में नियुक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने चिराग को केंद्रीय मंत्री के रूप में नियुक्त कर यह साबित कर दिया कि उनकी पार्टी पर भरोसा कायम है। चिराग ने शपथ ग्रहण के बाद कहा, “यह मेरे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है और मैं इसे पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ निभाऊंगा। इसका श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है जिन्होंने एक अकेले सांसद वाली पार्टी पर भरोसा किया और उसे पांच सीटें दीं।”
बिहार में दलित वोटरों पर पकड़
चिराग पासवान ने बिहार के हाजीपुर लोकसभा सीट से 1.70 लाख वोटों से जीत हासिल की। इसके अलावा, 2020 के विधानसभा चुनावों के विश्लेषण से पता चलता है कि चिराग ने भाजपा और जेडीयू को 54 सीटों पर नुकसान पहुंचाया, जिससे जेडीयू सिर्फ 43 सीटें ही जीत पाई। चिराग ने साबित कर दिया कि वे बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर करने में सक्षम हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार का प्रतिनिधित्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार को महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। बिहार से कुल आठ मंत्री शामिल किए गए हैं, जिनमें से चार कैबिनेट मंत्री हैं। यह कदम भाजपा की आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चिराग पासवान की कहानी एक युवा नेता के संघर्ष, मेहनत और समर्पण की कहानी है। अपने पिता की विरासत को संभालते हुए, चिराग ने राजनीति में अपने कद को स्थापित किया है। केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति न केवल उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वे बिहार की राजनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उनके नेतृत्व में लोजपा का भविष्य उज्ज्वल दिखाई दे रहा है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आने वाले वर्षों में किस तरह से राजनीति को दिशा देते हैं।