
विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने की दिल दहला देने वाली घटना के बाद शाहदरा की जिलाधिकारी ऋषिता गुप्ता ने मंगलवार को अस्पताल का दौरा किया। 25 मई को लगी इस आग में छह नवजात बच्चों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
डीएम ने किया दौरा, जांच में सामने आई चौंकाने वाली लापरवाहियां
शाहदरा डीएम ऋषिता गुप्ता ने मंगलवार को विवेक विहार में नवजात शिशु देखभाल केंद्र का जायजा लिया। उन्होंने कहा, “हम अस्पताल के लाइसेंस की समस्याओं पर भी गौर करेंगे और देखेंगे कि वहां क्या खामियां थीं।”
शाहदरा जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद जो रिपोर्ट तैयार की है, उसके अनुसार विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में लगी आग को बुझाने के बाद अस्पताल का निरीक्षण किया गया। इस दौरान वहां फटे हुए ऑक्सीजन सिलिंडर मिले।
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पुलिसकर्मियों, फायर ब्रिगेड स्टाफ और क्राइम टीम ने अस्पताल का गहन निरीक्षण किया और बाद में घटना के वक्त मौजूद नर्सिंग स्टाफ से भी पूछताछ भी की। निरीक्षण और पूछताछ के बाद पता चला कि अस्पताल में हर जगह लापरवाही बरती जा रही थी। जांच में ये बात निकलकर सामने आई है कि अस्पताल में एक भी आग बुझाने वाले यंत्र नहीं थे और कोई एमेरजेंसी एक्जिट भी नहीं थी। इसके अलावा एक बीएएमएस डॉक्टर की ड्यूटी मुख्य डॉक्टर के रूप में लगाई गई थी।
बड़ी लापरवाहियां जो सामने आईं
- लाइसेंस की अवहेलना: डीजीएचएस, सरकार द्वारा बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल को लाइसेंस जारी किया गया था। दिल्ली के एनसीटी की समय सीमा 31 मार्च, 2024 को पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
- बिस्तरों की संख्या: समाप्त हो चुके लाइसेंस के अनुसार केवल 5 बिस्तरों की अनुमति थी, लेकिन घटना के समय अस्पताल में 12 नवजात बच्चे भर्ती थे।
- डॉक्टर की अयोग्यता: ड्यूटी डॉक्टर नवजात शिशुओं का इलाज करने के लिए योग्य नहीं था, क्योंकि वह केवल बीएएमएस डिग्री धारक थे।
- अग्निशामक यंत्रों की कमी: आग लगने की स्थिति में आपातकालीन स्थिति के लिए अस्पताल में कोई अग्निशामक यंत्र नहीं था।
- आपातकालीन निकास का अभाव: सबसे बड़ी बात, किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में अस्पताल में कोई आपातकालीन निकास नहीं था।
अस्पताल की चार शाखाएं
पुलिस की जांच में पता चला है कि बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल की चार शाखाएं हैं। विवेक विहार के अलावा दिल्ली के पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी ये अस्पताल स्थित हैं। अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन पश्चिम विहार में रहते हैं, जो बाल चिकित्सा में एमडी हैं। उनकी पत्नी डॉ. जागृति दांतों की डॉक्टर है। दिल्ली पुलिस डॉ. नवीन को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
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32 ऑक्सीजन सिलिंडर और आग की भयावहता
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, पांच बेड वाले इस अस्पताल में ऑक्सीजन के 32 सिलिंडर रखे हुए थे। जो आग लगने के बाद एक के बाद एक फटते चले गए, जिससे आग और भयावय हो गई। शुरुआती जांच में यह भी पता चला कि डॉ. आकाश, जो आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं, को कम तनख्वाह पर रखा गया था।
नवजातों की दर्दनाक मौत
इस हृदय विदारक घटना में छह नवजात बच्चों की जान चली गई। इस हादसे ने न केवल उन बच्चों के परिवारों को, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा एक बार फिर से अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही को उजागर करता है।