
नई दिल्ली। रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में जोधपुर में एक भव्य प्लेटिनम जुबली समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट म्यूजियम का उद्घाटन किया और भारतीय न्याय प्रणाली में किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की शुरुआत, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के लागू होने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी कदम देश की संवैधानिक एकता को सुदृढ़ करने के लिए थे। उन्होंने फिर से ‘समान नागरिक संहिता’ की आवश्यकता पर बल दिया, जिसका उल्लेख उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर भी किया था। मोदी ने कहा कि यह केवल वर्तमान सरकार का विचार नहीं है, बल्कि दशकों से न्यायपालिका ने भी इसकी वकालत की है।
भारतीय न्याय संहिता
मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद, देश ने आखिरकार इंडियन पीनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहिता को अपनाकर ‘गुलामी की मानसिकता’ से बाहर आने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि BNS दंड की जगह न्याय पर आधारित है, जो भारतीय चिंतन का मुख्य आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में तेजी से बदलाव देखा है और अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। ऐसे में, हमारी न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का आधुनिक होना आवश्यक है।
आईटी क्रांति और न्याय व्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी ने आईटी क्रांति का जिक्र करते हुए कहा कि इससे न्यायिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने ई-कोर्ट्स और नेशनल ज्यूडिशल डेटा ग्रिड जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया, जो देशभर के 26 करोड़ से अधिक मामलों की जानकारी को एक केंद्रीय मंच पर लाने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जहां पेपरलेस कोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक सर्विस जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।
विकास की ओर न्यायपालिका की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने न्यायपालिका की सुधारात्मक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ‘चक्कर’ शब्द को खत्म करने के लिए देश ने प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने सस्ता और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि आईटी इंटिग्रेशन का प्रयोग गरीबों के सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है, और सरकार इसके लिए ‘दिशा’ जैसे इनोवेटिव सोल्यूशन्स को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, देश की अदालतों में स्थानीय भाषाओं में लीगल डॉक्यूमेंट्स और निर्णय उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं।
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