
नई दिल्ली। राजेंद्र नगर स्थित राव स्टडी सेंटर में हुई त्रासदी के बाद, जिसमें तीन छात्रों की जान चली गई, घटनास्थल पर कई पंप लगाए गए और देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा। छात्रों के अनुसार, बेसमेंट में पानी भरने की समस्या नई नहीं थी; पहले भी बारिश के दौरान पार्किंग में पानी भर जाता था और कभी-कभी बेसमेंट में भी आ जाता था। बावजूद इसके, स्टडी सेंटर प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया।
शिवम नामक एक छात्र ने बताया कि बेसमेंट में एक लाइब्रेरी और एक छोटा क्लासरूम है, जहां शिक्षक छात्रों की समस्याओं का समाधान करते हैं। बेसमेंट में जाने के लिए केवल एक ही मार्ग है, जो कि बायोमैट्रिक सिस्टम से सुरक्षित है। शिवम ने बताया कि शनिवार की भारी बारिश के बाद, सड़क पर लगभग साढ़े तीन से चार फीट पानी भर गया था। हादसे के कुछ ही देर पहले शिवम वहां से निकल गया था, और बाद में उसे पता चला कि कई छात्र अंदर फंसे हुए हैं। शिवम ने स्टडी सेंटर प्रशासन की लापरवाही को इस हादसे का जिम्मेदार ठहराया।
एमसीडी की सफाई के दावे असफल
एमसीडी हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई का दावा करती है, लेकिन इस बार भी नाले ओवरफ्लो हो गए, जिससे कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी घुस गया और तीन छात्रों की मौत हो गई। एमसीडी का दावा था कि 15 जून तक सभी नालों की सफाई हो चुकी थी, लेकिन यह हादसा उनके दावों की पोल खोलता है।
दिल्ली सरकार और एमसीडी की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार ने इस हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और मुख्य सचिव को 24 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा है। राजस्व मंत्री आतिशी ने कहा कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और इसमें दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एमसीडी भी इस मामले की जांच करेगी कि बेसमेंट में लाइब्रेरी चलाने की अनुमति थी या नहीं। मेयर शैली ओबराय ने कहा कि अगर एमसीडी की गलती पाई गई, तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। भाजपा नेता राजेश भाटिया ने पहले ही इस क्षेत्र में नालों की सफाई न होने का मुद्दा उठाया था।
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