
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल में बंद थें। वह 1 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय ED द्वारा गिरफ्तार हुए थे। उनके ऊपर आबकारी घोटाले में भ्रष्टाचार तथा मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगा था। उनके साथ मनीष सिसोदिया तथा अन्य मंत्री भी शामिल थे। 25 मई को दिल्ली में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की अंतरिम जमानत को स्वीकृति दे दे दी है। केजरीवाल 2 जून तक जमानत पर रहेंगे ।ऐसे में वह जेल से प्रशासन कैसे चला रहे थे? आइए जानते हैं:-
आखिर क्या थी आप पार्टी की स्ट्रेटजी
केजरीवाल के गिरफ्तार होने से पहले आप पार्टी ने मैं भी केजरीवाल कैंपेन चलाया।कैंपेन में दिल्ली वालों से पूछा गया कि उन्हें सीएम रहना चाहिए या नहीं। गिरफ्तार होने के बाद आप पार्टी में डिसाइड किया कि वह सीएम रहेंगे। पार्टी ने कहा कि यह फैसला दिल्ली वालों की इच्छा से है। केजरीवाल एक आईएएस ऑफिसर भी रह चुके हैं ।ऐसे में उन्हें कानून के बारे में पता ही होगा। वह जानते थे कि उन्हें क्या करना है।
एमसीडी के चुनाव 26 अप्रैल को होने वाले थे। लेकिन दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने पीठासीन अधिकारी को नियुक्त करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा उचित नहीं सीएम की गैर मौजूदगी में यह काम हो। मैं अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करुँ। केजरीवाल एक आईएएस ऑफिसर भी रह चुके हैं ऐसे में उन्हें कानून के बारे में पता ही होगा वह जानते थे कि उन्हें क्या करना है
केजरीवाल अपने मंत्रियों से मिल रहे थे
केजरीवाल ED की कस्टडी में 21 मार्च से 1 अप्रैल तक थे । वह अपन मंत्रियों को निर्देश दे रहे थे ।ताकि दिल्ली वालों को पानी की समस्या ना हो। उन्हें और भी फैसेलिटीज मिलती रहे। वह अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल द्वारा संचालन कर रहे थे। जैसे ही वह तिहाड़ जेल में गए । वह हर हफ्ते आधे घंटे के लिए मुलाकात करते थे ।वह दो कैबिनेट मंत्रियों से जरूर मिलते थे।
उनकी पत्नी और परिवार के अलावा उनसे पार्टी के और सदस्य भी मिले। उनमें से आप पार्टी सचिव संदीप पाठक ,आतिश और सौरभ केवल एक बार ही मिले ।वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवत सिंह ने उनसे दो बार मुलाकात की ।उनसे मुलाकात करने वाले ज्यादातर विजिटर मीडिया बाइट में कम होते थे। तिहाड़ जेल के जेलर का कहना है कि इंटरव्यूर और कैदी के बीच बातचीत हम एक ऐसी जगह करते थे ,जहां देख सके कि किसी नियमों का उल्लंघन ना हो।
क्या यह संवैधानिक उचित है

Representation of People Act 1951 की धारा 8 के अनुसार कोई भी MLA or MP अपने पद पर बना रहेगा। अगर वह दोषी है और वह 2 साल के लिए जेल में रहा है तो वापस से निष्कासित हो जाएगा । केजरीवाल के केस में अब तक ऐसा नहीं हुआ है। वह अभी तक दोषी साबित नहीं हुए हैं ।ऐसे में उनका पद पर बना रहना संवैधानिक है । और वह जेल से भी प्रशासन का संचालन कर सकते हैं।
केजरीवाल ने नहीं किया बैठक का आयोजन
जब से केजरीवाल तिहाड़ जेल में थे। तब से एक भी कैबिनेट मीटिंग का आयोजन नहीं हुआ है। दिल्ली विधानसभा का एक भी सत्र नहीं चालू हुआ है। अभी पार्टी अपना पूरा जोर इलेक्शन कैंपेन में लगा रही है । Lieutant governor का कहना है कि यह विचित्र है कि केजरीवाल किसी संवैधानिक कर्तव्य को पूरा कर सके।
कब लागू होता है राष्ट्रपति शासन
दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है। अनुच्छेद 356 में राज्यों पर राष्ट्रपति शासन लगाने का जिक्र है ।अनुच्छेद 239 (AA) के तहत केंद्र शासित प्रदेश में लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त करने का जिक्र है। दिल्ली में 2014 में एक ही बार राष्ट्रपति शासन लगा ।जब अरविंद ने (पार्टी अध्यक्ष ) अपने 49 दिन के सीएम कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे दिया था।
अनुच्छेद 239(AB) के तहत गवर्नर राष्ट्रपति को सुझाव देगा कि संवैधानिक तंत्र का विघटन हो रहा है।वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। Lieutenant Governor केंद्र और चयनित सरकार के बीच एक जुड़ाव की कड़ी है। अगर केजरीवाल इसी तरह से जेल में बंद रहे, तो सारे प्रशासनिक काम रुक जाएंगे। भले ही सारे मंत्री अपने काम पर ध्यान दें । कैबिनेट में एक सामंजस्यता नहीं दिखेगी। ऐसे में गवर्नर राष्ट्रपति को सुझाव देगा कि वह Failure of constitutional mqchinery [239 (AB)]लागू कर दें।
केजरीवाल के सामने चुनौतियां
अभी हाल ही में दिल्ली HC ने सरकार को MCD के 8 आठ लाख स्टूडेंट को कोई शैक्षिक सुविधा नहीं मिलने पर फटकार लगाई। हाई कोर्ट का कहना है कि वह इस्तीफा दे या ना दें। कोई भी राष्ट्र या उसकी जनता नहीं चाहती कि पद पर आसीन व्यक्ति जनता से कम्युनिकेट ना करें ।उसे सुविधा न दे या फिर अनिश्चितकाल के लिए अनुपस्थित रहे ।ऐसे में केजरीवाल की समस्याएं और बढ़ने वाली हैं। फिलहाल तो वह इलेक्शन के प्रचार में बिजी हैं।
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