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अयोध्या गैंगरेप कांड: पीड़िता के शरीर में हुई हीमोग्लोबिन की कमी; लगाई विशेषज्ञों की टीम

News Desk
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अयोध्या गैंगरेप कांड: पीड़िता के शरीर में हुई हीमोग्लोबिन की कमी; लगाई विशेषज्ञों की टीम

नई दिल्ली। अयोध्या के जिला महिला अस्पताल में भर्ती गैंगरेप पीड़िता की हालत अब स्थिर है, और उसे बेहतर इलाज देने के लिए एक विशेष चिकित्सा टीम नियुक्त की गई है। पीड़िता के शरीर में खून की कमी को देखते हुए उसके खानपान का भी खास ख्याल रखा जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर उसे अस्पताल के मेन्यू के अलावा भी बाहर से पौष्टिक आहार देने की अनुमति दी गई है, जिससे उसकी सेहत तेजी से ठीक हो सके।

पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा गांव में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद, पीड़िता को गर्भपात और इलाज के लिए 5 अगस्त को केजीएमयू, लखनऊ शिफ्ट किया गया था। वहां गर्भपात के बाद उसकी स्थिति में कुछ सुधार होने पर, शुक्रवार की देर शाम उसे दोबारा जिला महिला अस्पताल में भर्ती किया गया। पीड़िता को अस्पताल के चौथे तल पर स्थित एक प्राइवेट वार्ड में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है, जहां उसकी देखभाल के लिए दो-दो स्टाफ नर्स, वार्डब्वॉय और स्वीपर तैनात किए गए हैं।

खानपान का विशेष ध्यान

पीड़िता को उसकी हालत के अनुसार विशेष आहार दिया जा रहा है। शनिवार सुबह उसे दूध, ब्रेड और दलिया दिया गया, जबकि दोपहर में तहरी, रोटी और सलाद परोसा गया। बीच-बीच में उसे फल और अन्य पौष्टिक आहार भी दिए जा रहे हैं। सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि पीड़िता के बेहतर इलाज और खानपान के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। स्टाफ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किशोरी की इच्छानुसार, डॉक्टरों की सलाह से उसके लिए पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की जाए। डॉ. विभा स्वयं इलाज और खानपान की निगरानी कर रही हैं, जिससे पीड़िता की स्थिति अब सामान्य हो रही है।

घटनाक्रम की जानकारी

पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा में हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद 14 साल की किशोरी गर्भवती हो गई थी। उसके गर्भ में 12 सप्ताह का भ्रूण था। 29 जुलाई को सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान के खिलाफ केस दर्ज किया गया, और उन्हें जेल भेज दिया गया। 31 जुलाई को पीड़िता को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चूंकि किशोरी की उम्र और स्थिति को देखते हुए गर्भपात आवश्यक था, बाल कल्याण समिति ने भी इस पर सहमति जताई।

गर्भपात के दौरान पीड़िता की जान को खतरा बताया गया, और महिला अस्पताल में इस जटिल प्रक्रिया के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए उसे केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया गया। वहां उसके गर्भपात और डीएनए सैंपल लेने के बाद, जब उसकी हालत में सुधार हुआ, तो उसे शुक्रवार की देर शाम करीब आठ बजे वापस जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार उसके इलाज और देखभाल में जुटी है, जिससे उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर है।

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