
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र में बुधवार रात को भारी बारिश ने स्थानीय लोगों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए। बागीपुल में एक ही परिवार के चार लोगों समेत पांच अभी भी लापता हैं। नैन सरोवर और भीमडवारी नाले में बादल फटने से तीन दिशाओं में फ्लड फैल गया। एक ट्रैक सिंहगाड-बागीपुल-सतलुज से सटे कुर्पण खड्ड तक तबाही मचा गया। दूसरा ट्रैक रामपुर के सरपारा से तेजी खड्ड की ओर मुड़ा और तीसरा ट्रैक गानवी खड्ड की ओर गया। इस आपदा में करीब 36 लोग लापता हो गए हैं।
रात का खौफनाक मंजर
बुधवार रात करीब 12:20 बजे, बागीपुल के ग्रामीणों को बारिश के साथ भयंकर आवाजें सुनाई दीं। बिजली गुल थी और घना अंधेरा छाया हुआ था। ग्रामीणों को समझ आ गया था कि कोई बड़ी अनहोनी होने वाली है। वार्ड सदस्य कुमारी सुनीता, पुष्पेंद्र, रमेश कुमार, डॉ. प्रेम, नरेश ब्रामटा, राजेश कायथ, और जीवा राम ने बताया कि अंधेरे में भारी बारिश की वजह मालूम नहीं हो रही थी। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, लेकिन खड्ड के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में मुश्किल हुई। पुलिस की गाड़ियों की सायरन की आवाजें सुनाई दे रही थीं।
तबाही का मंजर
रातभर बारिश के थमने की दुआ कर रहे ग्रामीण सुबह पांच बजे जब बाहर निकले, तो उन्होंने तबाही का मंजर देखा। बागीपुल में बहुत ज्यादा नुकसान हो चुका था। एसडीएम, तहसीलदार, और पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच चुकी थी। बागीपुल के सात लोग लापता हैं, और मुख्य पुल टूटने से संपर्क कट चुका है।
प्रभावित गांव और लोग
फ्लड ने कुर्पण तक कहर बरपाया। केदस में छह गाड़ियां, दो बाइक, और एक मकान बह गए। बागीपुल से कुर्पण खड्ड तक करीब 12 फुट ब्रिज पानी में बह गए, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी क्षति पहुंची है। निरमंड (कुल्लू) में बादल फटने के बाद बागीपुल में हुई भयंकर तबाही ने एक परिवार के पांच लोगों को अपना ग्रास बना लिया। इसमें भरतभूषण की नानी भी शामिल हैं।
आपबीती कहानियाँ
भरतभूषण, जो अपनी पत्नी और बेटे के साथ दिल्ली में रहते थे, दो दिन पहले अपने ससुराल रेमु आए थे। वहां से बागीपुल अपने परिजनों से मिलने आए और वीरवार को वापस दिल्ली लौटने वाले थे। लेकिन, यह रात उनके जीवन की आखिरी रात साबित हुई।
बता दें कि बागीपुल में करीब 20 करोड़ का नुकसान आंका गया है। जियालाल का शव बरामद हुआ है, और वेदराम, जियालाल, रामलाल, मोतीराम, खूबराम, केसरीलाल, गौरी शंकर, खूशीराम, श्यामलाल, संतोष और अमर सिंह के मकान खड्ड में बह गए हैं। जबकि पांच मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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