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डॉक्टर की आपबीती: वायनाड हादसे के बाद पोस्टमॉर्टम में कांपने लगे हाथ

News Desk
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डॉक्टर की आपबीती: वायनाड हादसे के बाद पोस्टमॉर्टम में कांपने लगे हाथ

वायनाड। केरल की प्राकृतिक आपदा के बाद मृतकों का पोस्टमॉर्टम करने वाली एक डॉक्टर ने अपने भयानक अनुभव को साझा किया है। जिले में इस भयानक त्रासदी के दौरान मृतकों का पोस्टमॉर्टम करने वाली डॉक्टर ने कहा कि वह पूरी जिंदगी इस मंजर को नहीं भूल पाएगी। जिस तरह की तस्वीरें उसने विनाशकारी त्रासदी में ड्यूटी के दौरान देखीं, वे दिल दहला देने वाली थीं। सरकारी डॉक्टर ने त्रासदी का दिल दहला देने वाला विवरण साझा किया है।

भयावह अनुभव

डॉक्टर ने कहा कि वह पोस्टमॉर्टम करने की आदी है, लेकिन इस हादसे में ऐसी तस्वीरें देखने को मिलीं जो उसे हमेशा परेशान करेंगी। डॉक्टर ने भावुक होते हुए कहा कि पीड़ितों में से एक का शरीर इतनी बुरी तरह कुचला गया था कि वह दोबारा देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। डॉक्टर ने कहा, “यह ऐसा कुछ था जैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा था।”

भाग जाने का मन हुआ

डॉक्टर ने कहा कि भूस्खलन में लोगों के शव क्षत-विक्षत हो गए। एक बार ऐसा लगा कि मैं भाग जाऊं। वायनाड त्रासदी में अभी तक 267 लोगों की मौत हो चुकी है। डॉक्टर ने कहा कि उसे पोस्टमॉर्टम करने का कई सालों का अनुभव है, इस दौरान उसने कई वीभत्स डेडबॉडी देखीं, लेकिन भूस्खलन में मारे गए लोगों के शव बुरी तरह कुचल गए थे। यह कंपा देने वाला था। डॉक्टर ने कहा, “मैंने खुद से कहा कि जब मैंने पहला शव देखा तो मैं इसे संभाल नहीं पाऊंगी। यह बहुत कुचला हुआ था, और दूसरा शव एक साल के बच्चे का था। इसे देखकर, मुझे यकीन हो गया कि मैं इसे (पोस्टमॉर्टम) जारी नहीं रख पाऊंगी और मैं किसी ऐसे अस्पताल में भाग जाना चाहती थी जहां हम बचे हुए लोगों की देखभाल कर सकें।”

कठिन परिस्थितियों में काम

डॉक्टर ने बताया कि उस दिन उसके पास कोई विकल्प नहीं था। इसके बाद उसने 18 पोस्टमॉर्टम किए। रात 11:30 बजे तक पोस्टमॉर्टम किए गए। डॉक्टर ने कहा कि पोस्टमॉर्टम करने के लिए आठ टेबल थे और शाम तक उनके पास इतने फोरेंसिक सर्जन थे कि हर टेबल पर एक फोरेंसिक सर्जन था। शाम 7:30 बजे तक वे 53 पोस्टमॉर्टम पूरे कर पाए। आपदा के पहले दिन फोरेंसिक सर्जनों की टीम ने रात 11:30 बजे तक अपना काम जारी रखा और 93 से ज़्यादा शवों का पोस्टमॉर्टम पूरा किया।

मानसिक तनाव

डॉक्टर ने कहा कि स्थिति बहुत दयनीय है। उन्होंने पहले कभी ऐसी हालत में शव नहीं देखे। यहां तक कि अनुभवी डॉक्टरों को भी इस हालत में शवों को संभालना मुश्किल हो गया था। पीड़ितों की पहचान के लिए डीएनए विश्लेषण के लिए अंगों के नमूने एकत्र किए गए। डॉक्टर बिना आराम किए काम कर रहे हैं और विकृत शरीरों को चीरते हुए बहुत मानसिक तनाव में हैं।

मनोवैज्ञानिक परामर्श की जरूरत

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने जीवित बचे लोगों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि कई लोगों ने ऐसे दृश्य देखे हैं जो उन्हें जीवन भर परेशान करेंगे। वायनाड भूस्खलन त्रासदी के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें एंबुलेंस की लाइन लगी हुई है।

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