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भारत के तीरंदाजों की हार: धीरज-अंकिता ने कांस्य पदक कैसे गंवाया?

News Desk
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भारत के तीरंदाजों की हार: धीरज-अंकिता ने कांस्य पदक कैसे गंवाया?

पेरिस में चल रहे ओलंपिक्स में भारत के धीरज बोम्मादेवरा और अंकिता भकत की मिश्रित युगल तीरंदाजी जोड़ी का प्रदर्शन प्रशंसनीय रहा, लेकिन वे कांस्य पदक जीतने से चूक गए। भारतीय जोड़ी को अमेरिकी तीरंदाज कैसी कोउफहोल्ड और ब्रैडी एलिसन ने 6-2 से हराया।

मैच की शुरुआत

चौथे सेट की शुरुआत भारतीय जोड़ी ने की और पहले दो शॉट्स में 17 अंक बनाए। दूसरी ओर, अमेरिकी जोड़ी ने पहले दो शॉट्स में 19 का स्कोर किया और दो अंक की बढ़त ली। चौथे सेट में भारतीय जोड़ी ने कुल 35 का स्कोर किया जबकि अमेरिकी जोड़ी ने 37 अंक बनाए और सेट तथा मैच अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ, भारत के सामने कांस्य पदक जीतने का ऐतिहासिक मौका हाथ से निकल गया।

तीसरे सेट की वापसी

तीसरे सेट में धीरज और अंकिता ने बेहतरीन वापसी की और पहले दो शॉट्स में कुल 19 अंक बनाए, जबकि अमेरिकी जोड़ी ने 17 का स्कोर किया। भारतीय जोड़ी ने इस सेट में कुल 38 अंक बनाए और सेट जीतकर अपनी उम्मीदें जीवित रखीं। हालांकि, अमेरिका फिलहाल 4-2 से आगे चल रहा था।

दूसरे सेट की चुनौती

दूसरे सेट में भारतीय जोड़ी ने पहले दो शॉट्स में कुल 17 का स्कोर किया, जबकि अमेरिकी जोड़ी ने 18 अंक बनाए और एक अंक की बढ़त हासिल की। भारतीय जोड़ी ने कुल 35 अंक बनाए, लेकिन अमेरिकी जोड़ी ने 37 अंक बनाकर 4-0 की बढ़त बना ली। भारत को अब हर हाल में अगले सेट जीतने की आवश्यकता थी, वरना कांस्य पदक की उम्मीदें धूमिल हो जातीं।

पहले सेट की शुरुआत

पहले सेट में अमेरिकी जोड़ी ने शुरुआती दो शॉट्स में 19 अंक बनाए, जबकि भारतीय जोड़ी ने 17 अंक बनाए और दो अंक पीछे रह गई। अमेरिकी जोड़ी ने पहले सेट में कुल 38 अंक बनाए और भारतीय जोड़ी ने 37 अंक बनाए, जिससे अमेरिका ने पहला सेट 38-37 से जीत लिया।

कांस्य पदक का मुकाबला

अंकिता भकत और धीरज बोम्मादेवरा की भारतीय मिश्रित युगल तीरंदाजी जोड़ी के पास कांस्य पदक जीतने का सुनहरा अवसर था। पाब्लो गोंजालेस और ईलिया केनालेस की स्पेनिश जोड़ी को क्वार्टर फाइनल में 5-3 से हराने के बाद, भारतीय जोड़ी सेमीफाइनल में पहुंची थी। यह पहली बार था जब भारतीय तीरंदाज ओलंपिक में पदक के इतने करीब पहुंचे थे।

अमेरिकी जोड़ी को एक अन्य सेमीफाइनल में जर्मनी से हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय जोड़ी के लिए यह मुकाबला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। अगर भारतीय जोड़ी कांस्य पदक जीतने में सफल होती, तो यह तीरंदाजी में भारत का पहला ओलंपिक पदक होता।

इतिहास रचने से चूके

धीरज और अंकिता की भारतीय जोड़ी ने पेरिस ओलंपिक में तीरंदाजी स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंततः कांस्य पदक जीतने से चूक गई। उनकी हार से भारत के तीरंदाजी इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जुड़ने का सपना अधूरा रह गया। हालांकि, उन्होंने देश के लिए गर्व का मौका जरूर पैदा किया।

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