
केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन ने तबाही मचा दी है, जिसमें अब तक 173 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है। सेना राहत और बचाव कार्य में जुटी है, लेकिन मुंडक्कई में बड़ी पेड़ों को हटाने में भारी मशीनरी की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई घर इन पेड़ों के नीचे दबे हुए हैं।
मां का निस्वार्थ योगदान
इस त्रासदी के बीच, एक महिला ने उन बच्चों को अपना दूध पिलाने का निर्णय लिया है, जिन्होंने अपनी माताओं को खो दिया है। यह महिला इडुक्की से वायनाड आई है और अपने दो छोटे बच्चों के साथ यहां पहुंची है। उसने कहा, “मैं दो छोटे बच्चों की मां हूं। मैं जानती हूं कि मां के बिना बच्चों की क्या हालत होती है। इसलिए मैंने ये कदम उठाया।”
पति का समर्थन
महिला के इस कदम को उसके पति का पूरा समर्थन मिला। पति ने कहा कि जब उन्होंने उन बच्चों की खबर सुनी जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है, तो वे मदद करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया।
बचाव कार्य में चुनौतियाँ
मुंडक्कई में भूस्खलन से उखड़े विशाल पेड़ों को हटाने के लिए भारी मशीनरी की आवश्यकता है, जो वहां उपलब्ध नहीं है। बचावकर्मी एक इमारत की छत पर खड़े होकर बता रहे थे कि नीचे से बदबू आ रही है, जो कि शवों की मौजूदगी का संकेत है। उन्होंने कहा कि भारी मशीनरी के बिना तलाश अभियान में प्रगति करना मुश्किल है।
प्राकृतिक आपदा का कहर
भूस्खलन मंगलवार को तड़के करीब दो बजे और चार बजकर 10 मिनट पर हुआ, जब लोग सो रहे थे। मूसलाधार बारिश ने मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला, और नूलपुझा की बस्तियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। बचावकर्मियों का कहना है कि अभी भी और लोगों के मलबे में दबे होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें:
- Spela Trots Spelpaus Mars 2025
- Site Oficial De Cassino Online E Apostas Simply No Brasil
- Mostbet Bayerischer Rundfunk: Cassino Online Elizabeth Empresa De Apostas No Brasil
- Site Oficial De Cassino Online E Apostas Simply No Brasil
- Casa De Apostas Mostbet Com Apostas Esportivas Online
- Find your perfect match making a booty call