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WHO का अलार्म: 100 करोड़ से ज्यादा लोग बहरेपन के खतरे में, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?

News Desk
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WHO का अलार्म: 100 करोड़ से ज्यादा लोग बहरेपन के खतरे में, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की है कि दुनियाभर में बहरेपन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यह समस्या केवल वृद्ध लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में भी तेजी से फैल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से 35 वर्ष की आयु के 1 बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों में सुनने की क्षमता कमजोर होने या बहरेपन का जोखिम हो सकता है। इस बढ़ते खतरे का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, विशेषकर ईयरबड्स और हेडफोन का बढ़ता उपयोग है।

क्यों हो रहा है बहरेपन का खतरा?

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में बताया गया है कि तेज आवाज में लंबे समय तक ईयरबड्स से संगीत सुनना और शोरगुल वाली जगहों पर रहना आंतरिक कान को नुकसान पहुंचा सकता है। अधिकांश लोग, विशेषकर युवा, पर्सनल म्यूजिक प्लेयर के साथ ईयरबड्स या हेडफोन का उपयोग करते समय 85 डेसिबल से अधिक की ध्वनि का सामना करते हैं, जो कानों के लिए अत्यंत हानिकारक है।

आंतरिक कान की क्षति: स्थायी नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, आंतरिक कान की क्षति शरीर के अन्य भागों की क्षति की तरह ठीक नहीं होती। समय के साथ, तेज आवाज के संपर्क में आने से कान की कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती जाती हैं, जिससे सुनने की क्षमता में कमी आ जाती है। अगले कुछ दशकों में, वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोग इस समस्या का सामना कर सकते हैं।

सुनने की क्षमता में कमी और डिमेंशिया का संबंध

कोलोराडो विश्वविद्यालय के ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डैनियल फिंक के अनुसार, सुनने की क्षमता में कमी न केवल कानों की समस्याओं से जुड़ी होती है, बल्कि मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों जैसे डिमेंशिया का भी खतरा बढ़ जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, सुनने की समस्या वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा सामान्य से दो गुना और बहरेपन वाले लोगों में पांच गुना अधिक पाया गया है।

कैसे करें कानों की सुरक्षा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ध्वनि को 60-70 डेसिबल या उससे कम रखने से कानों को सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि, 85 डेसिबल या उससे अधिक की ध्वनि के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ईयरबड्स और हेडफोन्स का उपयोग करते समय ध्वनि की तीव्रता को नियंत्रित करना आवश्यक है, ताकि कानों की कोशिकाओं को क्षति से बचाया जा सके।

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