
भोपाल। मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद के विवादित ढांचे के सर्वे का काम 24 जून की शाम 6 बजे पूरा हो गया है। अब रिट्रीट और मेंटेनेंस का काम चलता रहेगा। तीन महीने से ज्यादा समय तक चले आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के पुरातात्विक सर्वे का निष्कर्ष क्या निकला ये एएसआई के दस्तावेजों में दर्ज है। 4 जुलाई को उनकी रिपोर्ट हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में जमा होगी। लेकिन इस निष्कर्ष रिपोर्ट का खुलासा कब होगा ये तय नहीं है। ये भी नहीं कहा जा सकता कि ऐसा होगा भी या नहीं क्योंकि, ये मामला अयोध्या, काशी जैसा ही संवेदनशील मुद्दा है।
भोजशाला का विवाद
मान्यता है कि धार जिले में स्थित 11वीं शताब्दी के स्मारक भोजशाला को हिंदू समाज द्वारा वाग्देवी यानि मां सरस्वती का मंदिर माना जाता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद कहता आया है। 7 अप्रैल 2003 को एएसआई की ओर से यहां आपसी मेल से एक व्यवस्था बनाई गई थी कि इस भोजशाला परिसर में हिंदू मंगलवार को पूजा कर सकेंगे और वहीं मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा कर पाएंगे। ये व्यवस्था तब से ऐसी ही चली आ रही है। इस जगह पर धार्मिक तनाव भी कई बार पैदा हुआ है, खासकर तब जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है तो मुस्लिम भोजशाला में नमाज अदा करते हैं और हिंदू पूजा करने के लिए कतार में लगे होते है।
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कब उपजा विवाद?
1875 में उत्खनन में यहां मां सरस्वती की एक प्रतिमा निकली जिसे बाद में अंग्रेजों द्वारा लंदन ले जाया गया। यह प्रतिमा अब लंदन के संग्रहालय में है। हिंदू समाज इसे मां सरस्वती को समर्पित मंदिर मानते हैं। हिंदुओं का दावा है कि राजवंश के शासनकाल में सिर्फ कुछ समय के लिए मुसलमान को भोजशाला में नमाज की अनुमति दी गई थी। वहीं मुस्लिम पक्ष के लोगों का कहना है कि वे यहां पर लंबे समय से नमाज अदा कर रहे है।
121 साल बाद फिर हुआ सर्वे
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई चली। इनमें से एक याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की थी, जिसने ज्ञानवापी की तर्ज पर भोजशाला का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सर्वे करवाने की मांग उठाई थी। 22 मार्च से एएसआई की टीम ने भोजशाला के 50 मीटर परिक्षेत्र में जीपीआर और जीपीएस तकनीकों से जांच की। एएसआई ने भोजशाला परिसर में स्थित हर चल-अचल वस्तु, दीवारें, खंभे, फर्श सहित सभी की कार्बन डेटिंग तकनीक से जांच की। 121 साल बाद फिर से एएसआई ने भोजशाला परिसर का सर्वे किया है।
सर्वे के दौरान क्या कुछ घटा
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिंदू-मुस्लिम पक्ष के दावों और अधिकारों की लड़ाई को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की सर्वे की मांग को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में पिटीशन के बाद 22 मार्च से शुरू हुए एएसआई सर्वे में अब तक भोजशाला से कई अवशेष मिले। इसमें हिंदू पक्षकारों के दावों के अनुसार, माता वाग्देवी, भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा, हनुमान सहित भैरवनाथ और अन्य देवताओं की प्रतिमाओं के साथ-साथ कई अवशेष मिले हैं। इससे पता चलता है कि प्राचीन भोजशाला हिंदू धर्म का हिस्सा है।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
भोजशाला परिसर में पूर्व दिशा में सर्वे की मांग के सवाल पर गोपाल शर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि इस दिशा में सर्वे कराया जाए। इसके लिए हम कोर्ट में आवेदन देंगे। वहीं, मुस्लिम पक्षकार अब्दुल समद ने कहा कि सर्वे के अंतिम दिन टीम का जो काम बाकी था, उसे तेजी से किया गया। जो काम रह गया है, वह जारी रहेगा। लेबलिंग का काम जारी रहेगा, पर खुदाई का काम बंद हो गया है। सर्वे इन्वेस्टीगेशन पूरा हुआ। एएसआई 4 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगा। अगर तय समय पर रिपोर्ट सबमिट नहीं कर पाए तो वे कोर्ट से रिपोर्ट पेश करने की मांग को आगे बढ़ा सकते हैं।
आकृतियों पर आपत्ति
अंतिम दिन सर्वेक्षण का जो काम चला, उसमें सात अवशेष मिले जो स्पष्ट नहीं दिख रहे थे। क्लीनिंग के बाद उनकी फोटो सबमिट होंगी तो पता चल जाएगा कि यह किस तरह की आकृतियां है। मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद के मुताबिक, “2003 के बाद सामग्री लाकर रखी है, उस पर हमारी आपत्ति थी कि सर्वे में शामिल न हो और उनका साल तारीख लिखी जाए।”
हिंदू पक्ष का दावा
मस्जिद में चल रहे सर्वे को लेकर हिंदू पक्ष ने 24 जून को बड़ा दावा किया। हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा ने कहा कि इस उत्खनन में एएसआई की टीम को भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा टीम को तीन अन्य अवशेष मिले, जिसे टीम ने संरक्षित कर लिया है। एएसआई की टीम को 4 जुलाई को कोर्ट के सामने साक्ष्य पेश करने हैं, जिसके आधार पर केस में सुनवाई होगी।
मुस्लिम पक्ष ने रखी अपनी बात
मुस्लिम पक्षकार अब्दुल समद ने एएसआई का आभार मानते हुए कहा कि अंतिम दो दिनों में जो खुदाई के दौरान इंसानी हड्डियां मिली थीं, उन्हें आज हमारे निवेदन पर एएसआई ने अलग से गड्ढा कर नियमानुसार तदफिन (गाड़) दिया। और किसी भी तरह का आज कोई पार्ट या टुकड़ा नहीं मिला।
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